भारत सरकार ने उत्तराखंड के हेमकुंड साहिब के दर्शन को आसान बनाने के लिए एक बड़ी परियोजना को मंजूरी दी है। केंद्रीय कैबिनेट ने गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक 12.4 किलोमीटर लंबी रोपवे परियोजना के विकास को स्वीकृति प्रदान की है। यह परियोजना राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम 'पर्वतमाला' के तहत विकसित की जाएगी, जिससे लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यात्रा में बड़ी राहत मिलेगी।
1. हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना का उद्देश्य
उत्तराखंड में स्थित हेमकुंड साहिब सिख समुदाय का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। इस रोपवे परियोजना का उद्देश्य तीर्थयात्रियों की यात्रा को आसान और सुगम बनाना है। अब श्रद्धालुओं को 21 किमी की कठिन चढ़ाई के बजाय केवल कुछ घंटों में दर्शन करने की सुविधा मिलेगी।
2. परियोजना की लागत और निर्माण प्रक्रिया
इस परियोजना को राष्ट्रीय रोपवे विकास कार्यक्रम 'पर्वतमाला' के तहत मंजूरी दी गई है।
- लागत: ₹2,730.13 करोड़
- लंबाई: 12.4 किमी
- तकनीक: मोनोकेबल डिटैचेबल गोंडोला (MDG) + ट्राइकेबल डिटैचेबल गोंडोला (3S)
- समाप्ति अवधि: 2025-2026
3. वर्तमान यात्रा में कठिनाई
फिलहाल श्रद्धालु गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक पैदल, टट्टू या पालकी से यात्रा करते हैं। ये यात्रा बुजुर्गों और महिलाओं के लिए काफी कठिन होती है।
4. रोपवे की यात्री क्षमता
- प्रति घंटे प्रति दिशा क्षमता: 1,100 यात्री
- प्रतिदिन यात्री क्षमता: 11,000 यात्री
- यात्रा का समय: 30-40 मिनट
5. हेमकुंड साहिब का धार्मिक महत्व
हेमकुंड साहिब 15,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यह सिख धर्म के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़ा हुआ है। हर साल यहां 1.5 से 2 लाख श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।
6. फूलों की घाटी और पर्यटन को बढ़ावा
हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान श्रद्धालु फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान का आनंद ले सकते हैं, जिसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है।
7. परियोजना के लाभ
- बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों के लिए सुविधा
- यात्रा का समय कम
- हर मौसम में यात्रा सुगम
- फूलों की घाटी तक आसान पहुंच
- स्थानीय रोजगार के अवसर
8. निष्कर्ष
हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना उत्तराखंड के धार्मिक और पर्यटन यात्रा के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। इससे लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान, सुरक्षित और आकर्षक बनाया जाएगा।
Explore Baaz UK पर पढ़ें ये पूरी खबर सबसे पहले!